जानवर ही जानवर, इंसान अब दिखता नहीं
नफरतों का मंजर है, प्यार अब दिखता नहीं
मर रहा आज यारों जिस कदर ये आदमी
उस कदर तो कोई जानवर भी मरता नहीं
पंछियों को भी हमने आपस में लड़ते देखा है
नफरतों का मंजर है, प्यार अब दिखता नहीं
मर रहा आज यारों जिस कदर ये आदमी
उस कदर तो कोई जानवर भी मरता नहीं
पंछियों को भी हमने आपस में लड़ते देखा है
यूँ तो बेरहमी से कोई खून किसीका बहाता नहीं
पवन प्रजापति 'पथिक'
पवन प्रजापति 'पथिक'
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