कन्या भ्रूण हत्या पर मेरी एक कविता उन लोगो के लिए जो अपनी बेटी को पैदा होते ही नालो में मरने के लिए छोड़ देते है
देख कर अब ये मंजर, इंसानियत शर्मिंदा है
मासूमों को क़त्ल कर, वो कातिल क्यों जिन्दा है
अरे तुमसे तो अच्छे जानवर, जो अपने बच्चो को दुलारते
और तुम तो इतने नीच हो, अपनी ही संतान को मारते
फूलो से नाजुक ये बच्चे, देखो किस हाल में मिलते है
जिनको गोद में होना था, वो नालो में पड़े मिलते है
अरे इनको भी खिलने देते, फूलो सा महकने देते
क्या तुम्हारा जाता जो, तुम इनको जिन्दा रहने देते
आज इनको हालत पर, हम सब शर्मसार है
इंसान अब है जानवर, और जानवर इन्सान है
पवन प्रजापति 'पथिक'
देख कर अब ये मंजर, इंसानियत शर्मिंदा है
मासूमों को क़त्ल कर, वो कातिल क्यों जिन्दा है
अरे तुमसे तो अच्छे जानवर, जो अपने बच्चो को दुलारते
और तुम तो इतने नीच हो, अपनी ही संतान को मारते
फूलो से नाजुक ये बच्चे, देखो किस हाल में मिलते है
जिनको गोद में होना था, वो नालो में पड़े मिलते है
अरे इनको भी खिलने देते, फूलो सा महकने देते
क्या तुम्हारा जाता जो, तुम इनको जिन्दा रहने देते
आज इनको हालत पर, हम सब शर्मसार है
इंसान अब है जानवर, और जानवर इन्सान है
पवन प्रजापति 'पथिक'
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