तुम इतराते हो अपनी जवानी पर
वो अपनी जवानी गँवा गए
तुम बंधवा रहे हो बहनों से राखी
वो सूनी कलाई चले गए
तुम खाते हो माँ के हाथ की रोटी
वो थाली खाली छोड़ गए
वो भी कर सकते थे प्यार मगर
वो सूनी मांगे छोड़ गए
बच्चे उनको भी प्यारे थे मगर
वतन से था उनको प्यार
तुम उंगली कटने पर रोते हो
वो हँसे हुई गर्दन कटा गए
'पथिक'
वो अपनी जवानी गँवा गए
तुम बंधवा रहे हो बहनों से राखी
वो सूनी कलाई चले गए
तुम खाते हो माँ के हाथ की रोटी
वो थाली खाली छोड़ गए
वो भी कर सकते थे प्यार मगर
वो सूनी मांगे छोड़ गए
बच्चे उनको भी प्यारे थे मगर
वतन से था उनको प्यार
तुम उंगली कटने पर रोते हो
वो हँसे हुई गर्दन कटा गए
'पथिक'
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