Tuesday, 11 September 2012

तुम इतराते हो अपनी जवानी पर
वो अपनी  जवानी गँवा गए
तुम बंधवा रहे हो बहनों से राखी
वो सूनी कलाई चले गए
तुम खाते हो माँ के हाथ की रोटी
वो थाली खाली छोड़ गए
वो भी कर सकते थे प्यार मगर
वो सूनी मांगे छोड़ गए
बच्चे उनको भी प्यारे थे मगर
वतन से था उनको प्यार
तुम उंगली कटने पर रोते हो
वो हँसे हुई गर्दन कटा गए
'पथिक'

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