हर सूरत बदसूरत लगती है जब तू इस परदे में रहती है
ये चाँद खुद शर्मा जाता है जब तू शर्म का गहना पहना करती है
लेकिन आज कल तुझे ये क्या हो गया है
तू बेपर्दा होकर ये शर्म का गहना भी उतार बैठी है
तू सोचती है की तू लगती है कोई हूर
लेकिन अब तो तू किसी बेशर्म तवायफ सी लगती है
'पथि
ये चाँद खुद शर्मा जाता है जब तू शर्म का गहना पहना करती है
लेकिन आज कल तुझे ये क्या हो गया है
तू बेपर्दा होकर ये शर्म का गहना भी उतार बैठी है
तू सोचती है की तू लगती है कोई हूर
लेकिन अब तो तू किसी बेशर्म तवायफ सी लगती है
'पथि
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