अपनों. का गम क्या होता है, जो अपनों. संग है वो क्या जाने?
क्यों राह ताकते नैना है, कोई क्या समझे कोई क्या जाने?
हम गँवा चुके हैं अपनों को आंसू का दरिया रीत गया
क्यूँ खून उतरा है आँखों में, जो कातिलों को पाले क्या जाने?
क्यों माँ अब भी दर पे बैठी, बेटे की राह तकती है?
उन आँखों की बेचैनी को, ये औलाद वाले क्या जाने?
देखो इस पागल औरत को, कहती है आएगा उसका पति
इस पागल के पागलपन को, ये सुहागने अब क्या जाने
क्यों राह ताकती बहना है, हाथो में कुमकुम थाल लिए
बहनों की तड़प क्या होती है, वो राखी बंधाये क्या जाने?
वो माँ अब भी रोटी है जब, सबको खाना खिलाती है
वो एक थाली क्यों खाली है, इसका जवाब कोई क्या जाने?
वो बच्चे पूछे अपनी माँ से, माँ पापा अब क्यों आते नहीं
लेकिन उस माँ की ख़ामोशी को, ये बेशरम नेता क्या जाने?
'पथिक' —
क्यों राह ताकते नैना है, कोई क्या समझे कोई क्या जाने?
हम गँवा चुके हैं अपनों को आंसू का दरिया रीत गया
क्यूँ खून उतरा है आँखों में, जो कातिलों को पाले क्या जाने?
क्यों माँ अब भी दर पे बैठी, बेटे की राह तकती है?
उन आँखों की बेचैनी को, ये औलाद वाले क्या जाने?
देखो इस पागल औरत को, कहती है आएगा उसका पति
इस पागल के पागलपन को, ये सुहागने अब क्या जाने
क्यों राह ताकती बहना है, हाथो में कुमकुम थाल लिए
बहनों की तड़प क्या होती है, वो राखी बंधाये क्या जाने?
वो माँ अब भी रोटी है जब, सबको खाना खिलाती है
वो एक थाली क्यों खाली है, इसका जवाब कोई क्या जाने?
वो बच्चे पूछे अपनी माँ से, माँ पापा अब क्यों आते नहीं
लेकिन उस माँ की ख़ामोशी को, ये बेशरम नेता क्या जाने?
'पथिक' —
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