जो दुश्मन का हाथ तुम्हारी ,
माँ की ओर है बढ़ रहा।
क्यूँ ना वो ही हाथ,
तुम्हारी तलवार से है कट रहा।
जो माँ की तरफ वो नजर उठी,
तो आँखें क्यूं ना नोच ली।
जो दिया उसने ललकार तुम्हे,
तो गरदन क्यूँ ना दबोच ली।
तू कृष्ण की सन्तान है
किस बात से है डर रहा।
तू सोच ले अब बिना युद्ध,
कोई विकल्प ना बच रहा।
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