आ गया है समय अब की महाकाल अब उठ जाये
आंच न आये धर्म पर, अधर्मी सब मिट जाये
बैरी की चढ़ा अब बलि बलि शीशों से धरती पट जाये
सदियों से प्यासी धरा को बैरी रक्त अब मिल जाये
जो आँख उठे माँ की और वो आँख सलामत अब न रहे
वो गिद्ध कर रहे इन्तेजार कब बैरी गिरे हम टूट पड़े पड़े
'पथिक
आंच न आये धर्म पर, अधर्मी सब मिट जाये
बैरी की चढ़ा अब बलि बलि शीशों से धरती पट जाये
सदियों से प्यासी धरा को बैरी रक्त अब मिल जाये
जो आँख उठे माँ की और वो आँख सलामत अब न रहे
वो गिद्ध कर रहे इन्तेजार कब बैरी गिरे हम टूट पड़े पड़े
'पथिक
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