रोता बच्चा करे पुकार,
माँ दूध क्यूं ना पिलाती है।
उसकी छाती में दूध कहां,
वो खुद भी भूखी सोती है।
जिस बच्ची को चाहिए दूध मक्खन,
वो कुत्ते की झूठन खाती है
रो पड़े शायद पत्थर भी लेकिन,
बेशर्मों को शर्म ना आती है।
भारत निर्माण के भले ही,
लाख दावे तुम कर लो।
पर इस देश की हालत पर,
‘आजाद’ की आत्मा भी रोती है
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