क्यूं मैं सोय हुओ जगाऊँ
किसको जाकर गीत सुनाऊँ
जब चाह नही उजियारे की
फिर क्यूँ मैं तम में दीप जलाऊँ
जब तुम चाह नहीं रखते हो
किसको जाकर गीत सुनाऊँ
जब चाह नही उजियारे की
फिर क्यूँ मैं तम में दीप जलाऊँ
जब तुम चाह नहीं रखते हो
पैरों पे खड़े भी होने की
फिर कहदो तुम कैसे कोशिश
करूं मैं हाथ बढ़ाने की
माँ की आन की खातिर जिनको
परवाह न थी सिर कटने की
वो सिर छुपाए बैठे हैं
क्यूँ करूं मैं बात जमाने की
‘पथि
फिर कहदो तुम कैसे कोशिश
करूं मैं हाथ बढ़ाने की
माँ की आन की खातिर जिनको
परवाह न थी सिर कटने की
वो सिर छुपाए बैठे हैं
क्यूँ करूं मैं बात जमाने की
‘पथि
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