क्यों जल रहा है देश अब
क्यों खो गई वो शान है
तू सोच कर बता जरा
क्या अब भी तुझे मान है
फिर क्यों तमाशबीन हो
तू तमाशा देखता
क्या देह में तेरी रक्त नहीं
या सो गई है वीरता
जब देश ही न रहा
किस पे करेगा मान तू
किसकी करेगा पूजा फिर
इस बात का कर ध्यान तू
किस बात का है भय तुझे
किस बात से है डर रहा
तू रामजी की है संतान
फिर जीतेजी क्यों मर रहा
मांगने से भी भला
अधिकार मिलता है कही
हो बाजुओ में जिसकी दम
जीतता सदा वही
तो आज फिर दिखादे तू
किस मिटटी से तू है बना
दुश्मनों के रक्त से
ये बदन अभी भी है सना
पवन प्रजापति 'पथिक'
क्यों खो गई वो शान है
तू सोच कर बता जरा
क्या अब भी तुझे मान है
फिर क्यों तमाशबीन हो
तू तमाशा देखता
क्या देह में तेरी रक्त नहीं
या सो गई है वीरता
जब देश ही न रहा
किस पे करेगा मान तू
किसकी करेगा पूजा फिर
इस बात का कर ध्यान तू
किस बात का है भय तुझे
किस बात से है डर रहा
तू रामजी की है संतान
फिर जीतेजी क्यों मर रहा
मांगने से भी भला
अधिकार मिलता है कही
हो बाजुओ में जिसकी दम
जीतता सदा वही
तो आज फिर दिखादे तू
किस मिटटी से तू है बना
दुश्मनों के रक्त से
ये बदन अभी भी है सना
पवन प्रजापति 'पथिक'
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