आतंकी हमलो में अपने पति को खो चुकी विधवा की तड़प
उसीकी जुबानी, यदि आपके पास इसका जवाब हो तो जरूर दें
इक आह सी मन में उठती है
दिल तड़प के रह जाता है
जब देखू उनका कातिल जिन्दा
दम मेरा निकल जाता है
जिनकी खातिर लड़ते लड़ते
वो जन अपनी गँवा बैठे
उनका कातिल तो जिन्दा
पर तुम क्यूँ बुजदिल बन बैठे
वो भी तो पिता थे पति थे
बच्चे उनके भी छोटे थे
तुम माँ की गोद में बैठे हो
वो भी किसी माँ के बेटे थे
वतन पर जान लुटाने की
कीमत कुछ इस तरह चुकाते है
कातिलों को जिन्दा रख
जख्मो पर नमक लगते है
गर हिम्मत है तो अपने बेटो को
सीमा पर भेज कर देखो
और फिर उसकी लाश पर
यूँ मौज मना कर के देखो
ये सूनी मांगे कहती है
अभी भी हिसाब बाकि है
आंसू का दरिया सूख गया
बस खून का सैलाब बाकि है
'पथिक'
उसीकी जुबानी, यदि आपके पास इसका जवाब हो तो जरूर दें
इक आह सी मन में उठती है
दिल तड़प के रह जाता है
जब देखू उनका कातिल जिन्दा
दम मेरा निकल जाता है
जिनकी खातिर लड़ते लड़ते
वो जन अपनी गँवा बैठे
उनका कातिल तो जिन्दा
पर तुम क्यूँ बुजदिल बन बैठे
वो भी तो पिता थे पति थे
बच्चे उनके भी छोटे थे
तुम माँ की गोद में बैठे हो
वो भी किसी माँ के बेटे थे
वतन पर जान लुटाने की
कीमत कुछ इस तरह चुकाते है
कातिलों को जिन्दा रख
जख्मो पर नमक लगते है
गर हिम्मत है तो अपने बेटो को
सीमा पर भेज कर देखो
और फिर उसकी लाश पर
यूँ मौज मना कर के देखो
ये सूनी मांगे कहती है
अभी भी हिसाब बाकि है
आंसू का दरिया सूख गया
बस खून का सैलाब बाकि है
'पथिक'
No comments:
Post a Comment