Tuesday, 11 September 2012

जिस देश का  राम था वहा आज  हालत मिलती है 
रावण की लंका की जगा, राम की अयोध्या जलती है 
जो राम हमारे  आदर्श है, अपमान उन्ही का होता है 
जिस पथ पे चले थे राम कभी उस पथ को ही  जाता है 
पर मौन है क्यों संतान राम की, क्या देह में राम का रक्त नहीं 
जो राम सेतु को तोड़ रहा वो कभी राम का भक्त नहीं 
जो हाथ बढे इस पथ की और, तो तोड़ के हाथ में दे देना 
सौगंध राम की है तुमको वहीँ जल समाधी दे देना 
'पथिक'

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