चिडि़या ने चहकना छोड़ दिया, फूलों ने खिलना छोड़ दिया
क्यूं बैठ कहीं किसी झुरमुट में, कोयल ने गाना छोड़ दिया
क्यूं आलम सारा बदल गया, खुशबू ने महकना छोड़ दिया
क्यूं मेरी इस बगिया में अब, तितलियों ने आना छोड़ दिया
क्यूं हर एक शख्स परेशां है, क्यूं हंसना सबने छोड़ दिया
क्यूं सावन में भी बागों में, बहारों ने आना छोड़ दिया
क्यूं बैठ फूल पे भंवरों ने, अब गुनगुनाना छोड़ दिया
क्यूं सावन की बून्दों ने, अब आग लगाना छोड़ दिया
क्यूं बैठ कहीं किसी झुरमुट में, कोयल ने गाना छोड़ दिया
क्यूं आलम सारा बदल गया, खुशबू ने महकना छोड़ दिया
क्यूं मेरी इस बगिया में अब, तितलियों ने आना छोड़ दिया
क्यूं हर एक शख्स परेशां है, क्यूं हंसना सबने छोड़ दिया
क्यूं सावन में भी बागों में, बहारों ने आना छोड़ दिया
क्यूं बैठ फूल पे भंवरों ने, अब गुनगुनाना छोड़ दिया
क्यूं सावन की बून्दों ने, अब आग लगाना छोड़ दिया
kya khub likha he likhane wale, jo hale dil he baya kiya. yeh soch ke hi aata he pyar ke,
ReplyDeleteusne likhane se pahale kya apna jiwan un ke liye bant liya